Monday, May 21, 2012

शिविर दूसरा दिन!

शिविर का दूसरा दिन ! उत्साह और व्यस्तता से भरा , आज हमारे साथ  शिविर की पहली निर्देशिका डॉ.  ज्योत्स्ना रघुवंशी जिन्हे सब प्यार से बुआ जी कहते है हमारे साथ थीं . आदरणीय श्री राजेंद्र रघुवंशी जी के एक गीत के साथ जागो रे जागो ... ! आज रक्षा ने भारत नाट्यम की कुछ प्रसिद्ध मुद्राओं को बच्चों को सिखाया और अभ्यास कराया साथ ही बाल रचनाओं को हमारी लोक नृत्य निर्देशिका अलका धाकड के साथ मिल के प्रस्तुति के लिए तैयार किया .जनवादी शायर अदम गोंडवी साब की रचनाएँ  पढ़ी गयीं और उनकी   प्रस्तुति  हो सके ऐसे दृश्य बंध तैयार किये गए .अंत में समूह गान के साथ आज का दिन पूरा हो गया !

Sunday, May 20, 2012

लिटिल इप्टा शिविर २०१२




कल लिटिल इप्टा का शिविर शुरू हो गया. यह शिविर का ३७ साल का हो गया . सुबह सुबह सूरसदन के बेसमेंट में महेंद्र राही जी के हारमोनियम की धुन पे "सा रे गा मा" गाते किशोर , बाल और युवा .... शिविर का प्रथम दिन इप्टा के महासचिव श्री  जीतेन्द्र रघुवंशी जी के सानिध्य में शुरू हुआ , उन्होंने सभी से परिचय लेते हुए उन्हें भाषा और उच्चारण के बारीकियों के बारे में बताया और हम सभी  उत्साहवर्धन किया , पहले दिन  हमारी बाल नृत्य प्रशिक्षिका रक्षा गोयल ने नृत्य के बेसिक स्टेप्स बताये और मुझ पर अभिनय पक्ष सँभालने की जिम्मेदारी थी . पहले दिन १५ बाल, किशोर और  युवा  कलाकार हमारे साथ थे,  "हम होंगे कामयाब " गीत को एक नारे की तरह लेते हुए शिविर का प्रथम दिवस उत्साह जनक था!

Thursday, May 27, 2010

गौतम का जाना .........

दोस्त भी गेजेस्ट्स के तरह होते हैं जब होते हैं तो हम उनको रफली यूज करते है और जब नहीं होते तो उनको बहुत मिस करते हैं .....गौतम की बीमारी ऐसी नहीं थी के जो ठीक नहीं हो सकती थी पर कुछ पता ही नहीं पड़ा के क्या हुआ ..और जब पता पड़ा तो देर हो चुकी थी....क्या दोस्त था यार एक दम मस्त ...जब बुलाओ तो पहले नखरा करता था फिर आता तो जाता ही नहीं था ...हमारी वर्कशॉप के म्यूजिक के लिए जब वक्त नहीं था तो सुबह चार बजे उठा और धीरज के घर पहुच कर नाटक का म्यूजिक तैयार किया फिर अपने काम पे चला गया .......सचमुच कुछ लोग अद्भुत होते हैं जो दिखाई नहीं पड़ते पर हर नाटक की जान होते है हम तुमको बहुत याद करते है गौतम .........

Tuesday, May 18, 2010

aaj

आज दस कलाकारों का समूह मथुरा में भगतसिंह की मूर्ति के नीचे खड़ा खड़ा गा रहा था ....नफ़स नफ़स कदम कदम, बस एक फ़िक्र दम ब दम , घिरे है हम सवाल से, हमें जबाव चाहिए ........ किस बात का जबाव ?
और कौन देगा ... किस से मांग रहे हो जबाव ....और तुम को ही क्यूँ दे ?
शलभ श्री राम का ये गीत जब हम गाते है तो गुस्सा आता है और फिर ...ख़तम भी हो जाता है
बाकी कल