Thursday, May 27, 2010

गौतम का जाना .........

दोस्त भी गेजेस्ट्स के तरह होते हैं जब होते हैं तो हम उनको रफली यूज करते है और जब नहीं होते तो उनको बहुत मिस करते हैं .....गौतम की बीमारी ऐसी नहीं थी के जो ठीक नहीं हो सकती थी पर कुछ पता ही नहीं पड़ा के क्या हुआ ..और जब पता पड़ा तो देर हो चुकी थी....क्या दोस्त था यार एक दम मस्त ...जब बुलाओ तो पहले नखरा करता था फिर आता तो जाता ही नहीं था ...हमारी वर्कशॉप के म्यूजिक के लिए जब वक्त नहीं था तो सुबह चार बजे उठा और धीरज के घर पहुच कर नाटक का म्यूजिक तैयार किया फिर अपने काम पे चला गया .......सचमुच कुछ लोग अद्भुत होते हैं जो दिखाई नहीं पड़ते पर हर नाटक की जान होते है हम तुमको बहुत याद करते है गौतम .........

Tuesday, May 18, 2010

aaj

आज दस कलाकारों का समूह मथुरा में भगतसिंह की मूर्ति के नीचे खड़ा खड़ा गा रहा था ....नफ़स नफ़स कदम कदम, बस एक फ़िक्र दम ब दम , घिरे है हम सवाल से, हमें जबाव चाहिए ........ किस बात का जबाव ?
और कौन देगा ... किस से मांग रहे हो जबाव ....और तुम को ही क्यूँ दे ?
शलभ श्री राम का ये गीत जब हम गाते है तो गुस्सा आता है और फिर ...ख़तम भी हो जाता है
बाकी कल